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आखिर क्या बात है वो, जो दोस्त बनाती है… ~ सुधिन्द्र मोहन शर्मा

हम सभी दोस्त बनाते हैं. माँ इस दुनिया मे हमारी पहली और सबसे अच्छी दोस्त होती है. उसीको हम सबसे पहले मिलते हैं इस दुनिया मे आकर, और उसीकी नजर में हम सबसे पहले आते हैं. थोड़ा बड़े होने पर, घुटनों पर चलते हुए या लड़खड़ाते कदमों के साथ जहां तक हमारी पहुंच होती है, अपनी नन्ही दुनिया को एक्स्प्लोर करते हुए अपने खिलौने, आस पास की छोटी छोटी चीजें , घर मे लगे पौधे, फूल, और घर के पालतू जानवर हमारे दोस्त बन जाते हैं.

हम सभी दोस्त बनाते हैं.
माँ इस दुनिया मे हमारी पहली और सबसे अच्छी दोस्त होती है. उसीको हम सबसे पहले मिलते हैं इस दुनिया मे आकर, और उसीकी नजर में हम सबसे पहले आते हैं.
थोड़ा बड़े होने पर, घुटनों पर चलते हुए या लड़खड़ाते कदमों के साथ जहां तक हमारी पहुंच होती है, अपनी नन्ही दुनिया को एक्स्प्लोर करते हुए अपने खिलौने, आस पास की छोटी छोटी चीजें , घर मे लगे पौधे, फूल, और घर के पालतू जानवर हमारे दोस्त बन जाते हैं.

Mother and her child girl playing together on autumn walk in nature outdoors. Happy loving family having fun.

स्कूल भेजे जाने की उम्र होते ही हमे स्कूल भेज दिया जाता है , और वहां पहली बार हमारे घर के बाहर के लोगों से हमारी मुलाकात होती है, उन्हीमे से , हमारे साथ पढ़ने वालों से , यहां तक कि हमारे टीचर्स भी हमारे दोस्त बन जाते है.
जैसे जैसे बड़ी कक्षाओं में जाते हैं, क्लासरूम से बाहर, खेल के मैदानों में, और अन्य गतिविधियों में दोस्त जुड़ते जाते हैं, लेकिन नर्सरी और प्री प्राइमरी के कुछ दोस्त छूटते जाते हैं.

कॉलेज में पहुंचते हैं तो बिल्कुल ही अलग नई दुनिया आपका स्वागत करती है , जो ज्यादा रंग बिरंगी है, स्कूल यूनिफार्म से बाहर कई रंगों के कपड़े और कई रंगों से भरी जिंदगी , और मित्रता की परिभाषा आपके लिए बदल जाती है. रंगों और दिखाई देने का, दर्शनीयता के आकर्षण का, असर हमारे दोस्त चुनने के तरीके पर होने लगता है.

और कॉलेज के उस पार इस तथाकथित असली दुनिया मे आपका स्वागत करता है यथार्थ . व्यापार, व्यवसाय और आपकी प्रोफेशनल लाइफ के साथ आप का दायरा फायदा नुकसान और तरक्की के अवसरों का हिसाब लगाते हुए घटता बढ़ता है. इसीमें कहीं आपको कोई मिलता है जो नया हो सकता है या स्कूल / कॉलेज का बिछड़ा हुआ दोस्त भी हो सकता है जो आपका बेस्ट फ़्रेंड बनता है.

आज फ्रेंडशिप डे यानी मित्रता दिवस पर कई पोस्ट और मैसेजेस पढ़ रहा था जिसमे मित्रों के गुण और उनकी खासियतों के बारे में बताया जा रहा है. और अचानक मेरे दिमाग मे ये विचार कौंधा कि जब हम बहुत छोटे होते हैं, स्कूल के बिल्कुल शुरुआती दिनों में तब हम इन दुनियावी बातों को और अच्छे दोस्तों की इन किताबी और तथाकथित खासियतों के बारे में तो नही जानते थे. लेकिन फिर भी हम दोस्त बनाते थे और खुद भी दोस्त बन जाते थे. तब हमारा दोस्त बनाने का लॉजिक क्या होता था, किस आधार पर हम किसीके दोस्त बनते थे. उस उम्र मे तो इतनी अक्ल होती नही कि आप पहले किसीके बारे में जानकारी बढ़ाओ, फिर उसका विश्लेषण करो, फिर दोस्त बनाओ .

उस नन्ही उम्र में तो ये होता है कि दोस्ती पहले होती है , और खासियतें बाद में मालूम होतीं हैं. तो ऐसा क्या होता है , या क्या क्लिक होता है, जो हमें किसीका दोस्त बना देता है ?

गंभीरता से इस पर विचार करने पर पाया कि यह जो क्लिक होता है, जो खास चीज होती है जो दोस्त बनने की प्रक्रिया को तेज कर देती है, वह है आवश्यकता, जरूरत. और सोचने पर ये पाया कि ये जरूरत की परिभाषा भी अलग अलग दोस्तों के लिए अलग अलग हो सकती है. तो कोई दो दोस्तों में दोनों की आवश्यकता अलग अलग हो सकती है. जब हम नर्सरी क्लासेस में थे तो हमे सुरक्षा या संबल की आवश्यकता थी, जो हमें हमारे बेंच पर पास बैठने वाले में मिलता था या हमारे टीचर में, और वे हमारे नैसर्गिक दोस्त हो जाते है. स्कूल और कॉलेज के बाद के दिनों में हमारी अपनी मानसिक और शारीरिक सुदृढ़ता के साथ सुरक्षा की इतनी आवश्यकता नही रहती जितनी किसी के साथ की. तो अच्छे परिवेश की और अच्छे संग साथ की तलाश दोस्त बनाती है.

Happy students communicating after classes in college cafe

कॉलेज के बाद इस असली दुनिया में व्यावसायिक और वित्तीय आवश्यकताएं दोस्त बनातीं हैं. सोशल मीडिया पिछले 10 साल से हमारे जीवन मे आया है जहां दोस्ती आकर्षण से ही होती है लेकिन फिर अलग अलग तरह की आवश्यकताओं के साथ , जिसमें कॉलेज के दिनों का अच्छी कंपनी वाला भाव सबसे अधिक होता है, ये दोस्ती आगे बढ़ती है या छूट जाती है.

लेकिन हमारा सबसे अच्छा दोस्त , (मां के बाद) फिर वो चाहे नर्सरी क्लास का बेंच मेट हो, हमारे टीचर हों, कॉलेज के हों , कॉलेज के बाद के व्यावसायिक दोस्त हों या सोशल मीडिया के दोस्त हों, सबसे अच्छा मित्र वो होता है जो हमारे भावनात्मक पक्ष की आवश्यकताओं को पूरा करता हो.

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