Homeसाहित्यकविताबोलो ना, क्या होगा तब? ~जहान्वी

बोलो ना, क्या होगा तब? ~जहान्वी

बोलो ना, क्या होगा तब?
दबे पाँव तेरे कमरे में, आऊँगी जब मैं!
तेरे प्यार की चाहत में, थरथराऊंगी जब मैं!

सीने में जो छिपा है, उसका इक़रार होगा….
या मुझे पाने को जिस्म तुम्हारा बेक़रार होगा?

मेरी रूह को, चांदनी की संगत होगी…
या उस काली रात में, तेरे ही रंगों की रंगत होगी?

मेरे अरमानों का, तेरे बिस्तर पर कोई मक़ाम होगा…
या ये दिल भी तुम्हारी, हवस का ग़ुलाम होगा?

मेरी गर्दन को लाल रंगने का एहसास होगा…
या आलम–ए–प्यार में, जुर्म बिंदास होगा?

मेरी साँसों में, साँसे पिरोने की लज़्ज़त होगी…
या होंठो से होंठ लगाकर, प्यार के नाम पे दहशत होगी?

तेरी उँगलियां मेरी नाभि से टकराने सरसराहट होगी…
या दर्द से मेरी ज़बान की कपकपाहट होगी?

तेरी पीठ और मेरे नाख़ुन का मिलाप होगा…
या काया की आग में, तेरा ज़मीर भी मेरे खिलाफ़ होगा !!!
-जहान्वी

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