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जाने वेंटिलेटर को लेकर इतना हंगामा क्यो हो रहा है ? ~ रविश वैद्य

कोरोना वायरस हमारे रेस्पिरेट्री सिस्टम पर अटैक करता है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है और इसलिए गम्भीर रूप से संक्रमित व्यक्ति को वेंटिलेटर लगाना बहोत ही आवश्यक होता है, बिना वेंटिलेटर के गम्भीर मरीजो का इलाज असम्भव है।

भारत मे कोरोना का पहला मरीज जनवरी में ही मिल गया था उसके बाद लगातार मामले बढ़ते गए और आज आंकड़ा 7 लाख को भी पार कर चुका है। आज विश्व मे सबसे ज्यादा संक्रमित मरीजो के मामले में भारत तीसरे नंम्बर पर आ चुका है और रोज औसत 20 हजार मरीज मिल रहे है जिसे देखते हुए वेंटिलेटर की शॉर्टेज होना स्ववाभिक है….

भारत सरकार ने वेन्टीलेटर्स की शॉर्टेज को देखते हुए पहला आर्डर 50 हजार का मार्च में ही दे दिया था जिसमे 10 हजार वेन्टीलेटर्स चाईना से और 40 हजार भारतीय कंपनियों से खरीदना तय हुआ जिसमे 30 हजार Skanray technology और Bharat electronic ltd के द्वारा और 10 हजार Agva healthcare से खरीदना थे, यहां तक तो सब ठीक था लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब Pm care fund का 28 मार्च को गठन हुआ उसके बाद 13 मई को 2000 करोड़ का अलॉटमेंट 50 हजार वेटिलेटर्स को खरीदने के लिए किया गया….

अब चाइना से सीमा विवाद के चलते जो 10 हजार वेन्टीलेटर्स चाइना से मंगवाये जा रहे थे उन्हें भारत की ही 3 अलग अलग लोकल कंपनियो को बनाने का ठेका दिया गया, अब जो आर्डर सरकार pm care fund गठित होने के पहले दे चुकी थी उसका भुगतान सरकार के खजाने से न हो कर pm care fund से क्यो किया गया इस पर विपक्ष को आपत्ति है क्यो की इस फंड का ना ही कोई ऑडिट हो सकता है और ना ही इस भुगतान की प्रकिया में कोई पारदर्शिता थी।

अब मई में Agva healthcare जिसे 10 हजार वेन्टीलेटर्स बनाने का ठेका मिला है उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने एक न्यूज पोर्टल को यह बताया कि agva अपने सस्ते वेन्टीलेटर्स के पुअर परफॉर्मेंस को छुपाने के लिए वेन्टीलेटर्स के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर रही है , वास्तव में वेन्टीलेटर्स का ऑक्सीजन लेवल 86% तक ही जा रहा है लेकिन सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर उसे 100% दिखाया जा रहा है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब मुम्बई के जे.जे. अस्पताल ने agva healthcare के 81 वेन्टीलेटर्स इसलिए रिजेक्ट कर दिए क्यो की यह वेन्टीलेटर्स से 100% ऑक्सीजन लेवल नही आ पा रहा था जिससे कोरोना के गम्भीर मरीजो की मौत भी हो सकती है। अब कंपनी के को फाउंडर दिवाकर वेश ने इन बातों पर अपनी सफाई देते हुए जरूर एक वीडियो जारी कर कहा कि उनके वेन्टीलेटर्स सबसे सस्ते है केवल 1,50,000 के इसलिये उनकी कंपनी को बदनाम किया जा रहा है और सब अफवाहें है ऐसी कोई बात नही।

अब बात करते है वेन्टीलेटर्स की डिलीवरी को लेकर दावों की तो यहां यह दावा किया जा रहा था के जून के अंत तक 50 हजार वेन्टीलेटर्स डिलिवर कर दिए जाएंगे, खुद बीजेपी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा ने एक वर्चुअल रैली में यह घोषणा की थी लेकिन 23 जून को PMO से जानकारी मिली के जून तक मात्र 2923 वेन्टीलेटर्स ही बन पाए है उसमें से 1340 वेन्टीलेटर्स अलग अलग राज्यो को डिलिवर्ड किये गये है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार ने 50 हजार वेन्टीलेटर्स 2 हजार करोड़ में खरीदे मतलब औसत रूप से प्रति वेन्टीलेटर्स सरकार 4 लाख रुपये खर्च कर रही है जबकि agva healthcare के एक वेन्टीलेटर्स कि कीमत 1.5 लाख रुपये है इस तरह प्रति वेन्टीलेटर्स 2.5 लाख रुपये ज्यादा दिए जा रहे है तो कुल 10 हजार वेन्टीलेटर्स का 250 करोड़ का घोटाला किया जा रहा है जिसका उपयोग सरकार आने वाले बिहार चुनाव में करेगी। साथ ही विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया जब agva healthcare के वेन्टीलेटर्स की क्वालिटी खराब है जिससे मरीज की जान भी जा सकती है तो क्यो सरकार इस कंपनी के वेन्टीलेटर्स लगातार खरीद रही है ?

50 हजार के दावों के बीच अभी मात्र 2923 वेन्टीलेटर्स का ही बन पाना यह एक बहोत ही गम्भीर मामला है क्यो की लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए आने वाले समय मे वेन्टीलेटर्स की डिमांड बहोत ज्यादा बढ़ने वाली है और अगर पर्याप्त वेन्टीलेटर्स नही होंगे तो कही इटली जैसे हाल न हो क्यो की इटली में कम वेन्टीलेटर्स के चलते केवल युवा मरीजो को ही प्राथमिकता दी जा रही थी बुजुर्ग मरीजो को नजरअंदाज किया गया।

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